रीमार्केटिंग और रीटार्गेटिंग: ऑनलाइन बिज़नेस में ग्रोथ का नया मंत्र
डिजिटल मार्केटिंग की दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ती जा रही है। आज हर कंपनी चाहती है कि उनके वेबसाइट विज़िटर्स बार-बार साइट पर आएं और अंततः ग्राहक बनें। ऐसे में रीमार्केटिंग और रीटार्गेटिंग जैसी रणनीतियाँ बिज़नेस के लिए बेहद प्रभावी साबित हो रही हैं। इन तकनीकों की मदद से आप अपने ब्रांड को लगातार उस यूज़र के सामने ला सकते हैं, जिसने कभी आपकी वेबसाइट, ऐप या प्रोडक्ट को देखा है, लेकिन खरीदारी नहीं की। आइए विस्तार से जानते हैं कि रीमार्केटिंग एवं रीटार्गेटिंग क्या है, ये कैसे काम करती है, और बिज़नेस ग्रोथ में इनका क्या महत्व है।
रीमार्केटिंग और रीटार्गेटिंग – क्या है अंतर?
बहुत बार इन दोनों शब्दों को एक जैसे संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन तकनीकी तौर पर दोनों में थोड़े अंतर हैं।
- रीमार्केटिंग – आमतौर पर यह ईमेल विपणन और सूची प्रबंधन जैसे पारंपरिक तरीकों पर आधारित होती है। इसमें उन यूज़र्स को टार्गेट किया जाता है, जिन्होंने पहले से आपके साथ कोई इंटरेक्शन किया है (जैसे – वेबसाइट पर साइन अप, कार्ट में प्रोडक्ट छोड़ना, आदि)।
- रीटार्गेटिंग – यह आमतौर पर डिस्प्ले विज्ञापनों (बैनर एड्स) और सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिये किया जाता है। इसमें कुकीज या ट्रैकिंग पिक्सल्स की मदद से यूज़र की ब्राउज़िंग हिस्ट्री को ट्रैक किया जाता है, और उन्हें ऑनलाइन विज्ञापनों के माध्यम से वही प्रोडक्ट या सर्विस दिखाई जाती है।
रीमार्केटिंग/रीटार्गेटिंग किस तरह काम करती है?
टेक्निकल प्रक्रिया
- जब कोई विज़िटर आपकी वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर आता है, उस समय एक छोटा सा कोड (जैसे Google Ads Pixel या Facebook Pixel) उसके ब्राउज़र में इंस्टॉल हो जाता है।
- यह ट्रैकिंग कोड उस यूज़र की एक्टिविटीज़ को रिकॉर्ड करता है—उदाहरण के लिए, उसने कौन सा प्रोडक्ट देखा, क्या कार्ट में कोई आइटम ऐड किया आदि।
- बाद में, जब वही यूज़र इंटरनेट पर दूसरी वेबसाइट्स या सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स का इस्तेमाल करता है, तो एड नेटवर्क्स उसे आपका टार्गेटेड ऐड दिखाते हैं।
ईमेल रीमार्केटिंग का उदाहरण
- मान लीजिए किसी ग्राहक ने कार्ट में प्रोडक्ट ऐड किया लेकिन खरीदारी नहीं की। अब ऑटोमेटेड सिस्टम उस कस्टमर को एक पर्सनलाइज्ड ईमेल भेजता है जिसमें कार्ट में छोड़े गए प्रोडक्ट्स की याद दिलाई जाती है और खरीदारी पूरी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
रीमार्केटिंग/रीटार्गेटिंग से विज़िटर्स को कैसे वापस लाया जाता है?
मानव मनोविज्ञान के अनुसार, लोग प्रायः तुरंत निर्णय नहीं लेते। वे बार-बार सोचते हैं, जानकारी लेते हैं और दूसरी वेबसाइट्स व प्रोडक्ट्स से तुलना करते हैं। ऐसे में यदि आपका ब्रांड लगातार उनकी नज़रों के सामने रहे, तो खरीदारी की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
- याद दिलाना – रीटार्गेटिंग एड्स यूज़र को यह याद दिलाते हैं कि उन्होंने आपकी वेबसाइट विज़िट की थी या कोई प्रोडक्ट देखा था।
- विश्वास बढ़ाना – बार-बार विज्ञापन देखने से ब्रांड के प्रति भरोसा बनता है और यूज़र सोचता है कि यह एक स्थापित कंपनी है।
- ऑफ़र और छूट देना – रीमार्केटिंग ईमेल या एड्स के ज़रिए कस्टमर को खास ऑफ़र, कूपन या डिस्काउंट कोड भेजे जा सकते हैं, जिससे वे वापस लौटने के लिए प्रेरित हों।
रीमार्केटिंग/रीटार्गेटिंग के प्रमुख फायदे
- कन्वर्ज़न रेट में बढ़ोतरी: जो ग्राहक आपकी वेबसाइट पर एक बार आ चुके हैं, उनके दोबारा वापस आकर खरीदारी करने की संभावना दोगुनी होती है।
- मार्केटिंग बजट का प्रभावी इस्तेमाल: रीमार्केटिंग टार्गेटेड होती है, यानी पैसा बेवजह खर्च नहीं होता।
- ब्रांड रिकॉग्निशन में इजाफा: बार-बार विज्ञापन दिखने से लोग ब्रांड को याद रखते हैं।
- कस्टमर लाइफटाइम वेल्यू बढ़ाना: पुराने ग्राहकों को भी नए ऑफ़र्स या प्रोडक्ट्स के बारे में याद दिलाया जा सकता है।
बिज़नेस के लिए व्यावहारिक उदाहरण
ई-कॉमर्स स्टोर्स
अगर आपके पास ऑनलाइन शॉप है तो रीटार्गेटिंग या रीमार्केटिंग से हर उस विज़िटर को दोबारा टार्गेट किया जा सकता है, जिसने कोई प्रोडक्ट देखा है लेकिन खरीदारी नहीं की। इससे बिक्री की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सर्विस बेस्ड कंपनियाँ
कई बार लोग आपकी सर्विस पेज देखकर छोड़ देते हैं। रीमार्केटिंग ऐड्स के जरिए उन सभी यूज़र्स को अपनी सर्विस की खासियत या सीमित ऑफर की जानकारी देकर फिर से एंगेज किया जा सकता है।
B2B बिज़नेस सॉल्यूशंस
अगर कोई विज़िटर आपके प्रोडक्ट/सर्विस की डेमो पेज पर आया, लेकिन संपर्क नहीं किया, तो रीटार्गेटिंग के द्वारा उनसे दोबारा जुड़ना और बिज़नेस लीड प्राप्त करना संभव है।
रीमार्केटिंग और साइबर सुरक्षा के पहलू
विज़िटर्स का डेटा कलेक्ट करते समय गोपनीयता और डाटा सुरक्षा का पालन करना बेहद जरूरी है। यूरोपीय देशों में GDPR और भारत में DPDP जैसे कानूनों के तहत यूज़र्स की सहमति (consent) लेना अनिवार्य है। इसके अलावा ट्रैकिंग सामग्री (cookies, pixels आदि) के बारे में यूज़र्स को पूरी जानकारी देना बिज़नेस की जिम्मेदारी है।
- डाटा एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करें।
- फालतू या अनावश्यक डेटा स्टोर न करें।
- यूज़र की प्राइवेसी-पॉलिसी को पारदर्शी और अपडेटेड रखें।
रीमार्केटिंग/रीटार्गेटिंग को अपनाने के लिए सुझाव
- सर्वश्रेष्ठ प्लेटफॉर्म चुनें (Google Ads, Meta/Facebook Ads, LinkedIn Ads आदि)।
- स्पष्ट और आकर्षक क्रिएटिव्स बनाएं—ऐसे विज्ञापन जो यूज़र्स को तुरंत आकर्षित करें।
- RFM (Recency, Frequency, Monetary value) मॉडल अपनाएँ—यह निर्धारित करें कि किस यूज़र से कब और कैसे संपर्क करना चाहिए।
- अनावश्यक रूप से ज्यादा बार एक ही यूज़र को विज्ञापन न दिखाएँ (frequency capping)।
- अभियानों का लगातार विश्लेषण और सुधार करते रहें।
अपने डिजिटल बिज़नेस को नई ऊँचाई पर ले जाएँ
रीमार्केटिंग और रीटार्गेटिंग वर्तमान डिजिटल युग में कस्टमर अधिग्रहण और रिटेंशन के सबसे प्रभावी टूल्स बन चुके हैं। यदि आप स्मार्ट तरीके से इन रणनीतियों को अपनाते हैं, तो अपने मार्केटिंग बजट का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए बिक्री और ब्रांड वैल्यू दोनों बढ़ा सकते हैं। साइबर इंटेलिजेंस एंबेसी (Cyber Intelligence Embassy) के विशेषज्ञों की मदद से आप डिजिटल मार्केटिंग व डाटा प्राइवेसी—दोनों क्षेत्रों में सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं। अपनी मार्केटिंग रणनीति को आज ही आधुनिक बनाइए, और प्रतिस्पर्धा में आगे रहिए।